भारत में वैज्ञानिक अध्ययन, चिंतन की अत्यंत प्राचीन एवं समृद्ध परंपरा रही है। हमारे यहाँ विज्ञान के क्षेत्र में भी असाधारण शोध-कार्य हुए हैं। प्राचीन काल से ही हमारे त्रिकालदर्शी भारतीय मनीषियों, यथा-धन्वंतरि, भरद्वाज, सुश्रुत, चरक, शालिहोत्र, आर्यभट, कणाद, ब्रह्मगुप्त, रेवण, आत्रेय, वराहमिहिर, भास्कराचार्य, नागार्जुन, यशोधर, वेदव्यास आदि ने विज्ञान के विविध क्षेत्रों में गहन अनुसंधान किया।
वस्तुतः गणित का विकास विश्व में सबसे पहले भारतवर्ष में ही हुआ, जिसका उल्लेख वैदिक गणित में मिलता है। भारत में वेदिक काल से ही रसायन विज्ञान में गवेषणाओं की सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक
प्रणाली विकसित हो गई थी। आयुर्वेदीय सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप देने में सर्वाधिक योगदान महर्षि चरक क